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बुलबुला

बुलबुला

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ये बुलबुला पानी का 
ख़ुशियों की रवानी का
क्या, आसमाँ में उड़ पायेगा?

जहाँ, अमीरों के चाँद सितारे हैं
ऊँची नज़रें ऊँचे नज़ारे
क्या, उन आँखों को झुका पाऐगा ?
क्या, आसमाँ में उड़ पाऐगा ?

मुझे डर है, कहीं फूट न जाऐं 
मज़हबी दंगो में दबकर
फिर भी कहाँ जाऐगा 
जात पात के चंगुल से बचकर
क्या, मानव भेद-भाव छोड़ पाऐगा 
क्या, आसमाँ में उड़ पाऐगा!

 

 


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