बसंत (कज्जल छंद)
बसंत (कज्जल छंद)
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कज्जल छंद
(14 मात्रा, तुकांत, अंत - गुरु लघु)
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छायी बसंत की बहार।
बहे मादक-मस्त बयार।
पहन पुष्प लता का हार।
प्रकृति करे भव्य श्रृंगार।
छेड़े सुरभित पवन तान।
कोकिलों का मीठा गान।
ले कलित कमनीय कमान।
चले कामदेव के बान।
मत पूछ कैसा है हाल।
समय की कुछ ऐसी चाल।
नेत्रों से आँसू निकाल।
कविताओं में दिया डाल।
