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Mohan Arora

Others

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Mohan Arora

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बेबसी

बेबसी

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कसम से ज़िंदगी में यूं न बेबसी होती

अगर ताउम्र तेरी रहबरी मिली होती


न सजती दर्द की महफ़िल न मैं मिटी होती

बहार आने की उम्मीद गर बची होती


तुम्हारा साथ जो मिलता वफ़ा की राहों में

हमारे प्यार के हिस्से में हर ख़ुशी होती


तुम्हारी सादगी पे दिल न ये आया होता

न दिल मैं हारती तुझपे, ना बेख़ुदी होती


कभी तू झूठ ही कह दे, तू याद करता है

यक़ी होता नहीं मोहन फ़िर भी मुझे ख़ुशी होती 



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