" बदलते रिश्ते "
" बदलते रिश्ते "
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समय के साथ बदलते रिश्ते
यही मन को समझाना
आज हम मानते अपनों को!
कल बन जायेंगे दूसरों के
समय तो वहीं है
रात और दिन भी है
पर बदल जाता है
मनुष्य समय के चक्र में।
