'बचपन की यादें'
'बचपन की यादें'
1 min
346
बचपन की कई बातें भूले,
पर नहीं भूले गांवनि की गलियां।
कहां गये गांव के ताल और तलैया।
चनों की भाजी और तुरैया।
मीठी लगें बटरी की फलियां।
पर नहीं भूलें गांवनि की गलियां।
सावन के महीना में झूला झूलते थे।
कातक के महीना भर, तला सपरत थे।
का-का बतायें तुम्हें गुइया।
पर नहीं भूलें गांवनि की गलियां।
हरिया भगावें दुसाखा धरत थे।
पानी से वचवें ढबूआ बनत थे।
खलियानों की मिट गई मड़ैया।
पर नहीं भूलें गांवनि की गलियां।
लछ्छे बताने, चांदी के चूरा।
लम्बी गढेलू बड़े-बड़े मूरा।
कहां गये बोइया टुकनिया।
पर नहीं भूलें गांवनि की गलियां।
बचपन की कई बातें भूले।
पर नहीं भूलें गांवनि की गलियां।
