STORYMIRROR

Sukanta Nayak

Others

3  

Sukanta Nayak

Others

बचपन और बारिश

बचपन और बारिश

1 min
484

छोटी छोटी बातों में खुश हो जाना

एक चॉकलेट के लिए झगड़ जाना

हर एक शरारत में एक दूसरे का साथ देना

वो इतिहास हो या संस्कृत की शिक्षक से मिल के मार खाना

जब कोई मुश्किल पड़ जाये तो मिल के सामना करना

याद आये वो सब लम्हे

दोस्ती के हसीन पल जो काटे हैं हमने।


हर एक मौसम का था अलग ही मज़ा

सबसे सुंदर बारिश का मौसम

गर्मियों की ताप से उभर के जैसे प्राणों में भर जाये एक नई ऊर्जा। 


छुट्टियों का खत्म होना

फिर दोस्तों का जुट जाना 

पाठशाला में मस्तियों का आगाज़ होना

बारिश की हल्की बूंदों में नाचना

मिट्टी की खुश्बू से जैसे झूम जाना।


क्या नदी क्या तालाब पानी भर जाना

जैसे उम्मीदों को सच होते देखना

याद आये वो दिन 

हर मस्तियों के लिए करना झूठा बहाना

जमे हुए पानी मे कूदना, एक दूसरे को छीटें मारना

बारिश की पानी तन मे गिरना 

लगे हैं जैसे कोई विद्युत दौड़ जाना।


कुछ पल कुछ यादें भुलाये ना भूले

बचपन की हर एक मस्ती 

झूमते नाचते बारिश के वो दोस्त

फिर लौट के ना आते चाहे मिट जाये हस्ती।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन