बाल कविता : "मोर"
बाल कविता : "मोर"
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छत पर उड़कर आया मोर।
सबके मन को भाया मोर।।
सुंदर और सजीला मोर,
अजब गजब चमकीला मोर,
पंछी विशेष बताया मोर।
सबके मन को भाया मोर।।
सिर पर कलगी बड़ी निराली,
बोली पीहू पीहू वाली,
वर्षा संदेशा लाया मोर।
सबके मन को भाया मोर।।
इसकी लंबी गर्दन नीली,
इसकी पंखें रंग रंगीली,
छत पर नाच दिखाया मोर।
सबके मन को भाया मोर।।
सुंदर रूप लुभाता है,
राष्ट्रीय पक्षी कहलाता है,
सुंदरता पर इठलाया मोर।
सबके मन को भाया मोर।।
