बाकी है
बाकी है
थोड़ी सी जिंदिगी जी है मैंने
अब भी बहत कुछ बाकी है।
पर उम्र खत्म कर चुका सारी
कुछ एक पल ही बाकी है।
बाकी है बहुत सारी ख्वाहिशें
उम्मीदों की गागर भरा नहीँ
उड़ने को गगन अनंत
तैर पार करने को सागर बाकी है।।
बटोर रहा हूँ वो सब कुछ
जब जहां जो सुहाना मिला।
खर्च कर दिया जो संजोया था
फ़िर भी बांटने को बहूत बाकी है।।
सुख बांटा दुःख छांटा
फ़िर भी फायदे मे हूँ।
क्या खोया , क्या पाया
हिसाब लगाना बाकी है।
अंधेरे में रोशनी की तलाश
करता तो है हर कोई,
हिम-सफेद नकाब मे छिपे
वो कालिख छांटना बाकी है।
गांठ बांध रखा हूँ जो रतन
साथ ले जा नहीँ सकता।
जाने से पहले वो सारी
आप पे लुटाना बाकी है।।
