अतीत और भविष्य
अतीत और भविष्य
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जाने क्यों अतीत
मेरा पीछा नहीं छोड़ता
मैं चाहते हुए भी कभी
वर्तमान में नहीं होता
जाने क्यों भविष्य की
चिंता में भी नहीं सोता
क्यों अतीत को में
रद्दी कागज सा संजोता
जो मेरे वर्तमान को
दीमक की तरह है कचोटता
भविष्य को संवरने से है रोकता
जान ले जीवन टिशू पेपर नहीं होता
क्यों बेवजह इसे तू खोता
हर पल तेरा है स्वर्णिम पल
जो है सोता वो सदा को रोता।
