असली होलिकादहन..
असली होलिकादहन..
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सत्य कभी पराजित ना होता ना कोई कर सकता दहन
लकिन खुद को भगवान समझने वाले राजा ने दिया था
भक़्त प्रहलाद को जलाने का समन
मिला था वरदान कभी ना जलने का इसी
अहंकार में सत्य को मिटाने पहुंच गयी उस अज्ञानी की बहन
लेके गोद में बैठ गई भक्त को
उठने लगी थी अब विशाल अग्नि की पवन
खुद ही अग्नि में भस्म हो गयी होलिका
क्यों की बालक ने किया था ईश्वर का सच्चे मन से स्मरण
जब जलयेगी अपने अंदर की सारी बुराइयां
और समाज में होगा नयी सोच और
भाई चारे का उमंग तभी होगा असली होलिका दहन।
