★अनुपम बसंत★
★अनुपम बसंत★
सरसों के खेत हरे, पीले परिधान में।
दमक रहीं गेहूँ की बालियाँ, सुनसान में।
स्वागत ऋतुराज का, करने तैयार सब।
आतुर हैं मिलन को, राह देखें बार बार सब।
धरती की प्रतिकृति दिखती आसमान में।
सरसों के खेत हरे, पीले परिधान में।
अनुपम बसंत लाया, जीवन में बहार है।
ऋतुराज कामदेव सौम्य रति का उपहार है।
रंगीला मौसम आया, आज है उफान में।
सरसों के खेत हरे, पीले परिधान में।
परिवेश प्रमुदित है, प्रफुल्लित सब आज हैं
मानव खुशहाल सब, करें नृत्य साज बाज हैं।
ऋतुराज सहयोगी हुए, क्षोभ के निदान में।
सरसों के खेत, हरे पीले परिधान में।
हरदिल मदमस्त हो कर भाँगड़े की थाप में।
नृत्य करें मनमोहक, है रोक जो विलाप में।
कैसे खुशहाल सब हैं, दिख रहा बयान में।
सरसों के खेत हरे पीले परिधान में।
