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Pradeep Mani Tiwari

Others

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Pradeep Mani Tiwari

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★रसमय बसंत★

★रसमय बसंत★

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रसमय बसंत आया,सबको है उर से भाया।

ऋतुराज की प्रथा जो,उसको सहर्ष निभाया।


लतापुष्प खिलखिलाए, पपिहा ने सुर मिलाए।

ये ताल के कमलदल, हर्षित हो मुस्कुराए।

ये पंछियों का कलरव,सुर में है सुर मिलाया।

रसमय बसंत आया,सबको है उर से भाया।


सुकुमार कोंपले भी आतुर हुईं मिलन को।

अनुपम खुशी हुई है,सृष्टि सकल भुवन को।

अनुपम सुरम्य मौसम,जन जन को है लुभाया।

रसमय बसंत आया,सबको है उर से भाया।-


गेहूँ की बालियाँ और सरसों है लहलहायी।

झूमे किसान गाएं,बिरहा की धुन है आयी।

जिसने भी देखा मौसम,मद में वही समाया।

रसमय बसंत आया,सबको है उर से भाया।


बालक किलोल भरते,वे खेलते सुमन लगे।

मदमा रही किशोरी,यौवन भरी चुभन से।

जिसने भी देखा,खुश हो,दिल से है गुनगुनाया।

रसमय बसंत आया,सबको है उर से भाया ।


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