STORYMIRROR

Pradeep Mani Tiwari

Others

3  

Pradeep Mani Tiwari

Others

★उल्लासमय बसंत★

★उल्लासमय बसंत★

1 min
205


उल्लासमय बसंत,सुरभित हुआ भुवन।

लो आज भर गया,खुशियों से ये गगन।


चहुँदिशि सुमन हैं सुरभित,चादर है तृण की प्रसरित

सौन्दर्यमय है मौसम,लताबेल पुष्प प्रफुल्लित

ऋतुराज आगमन से,रति काम हैं मगन

उल्लासमय बसंत,सुरभित हुआ भुवन।


अनुराग का है मौसम,सरिता की नेह कलकल

आया उमंग स्वर्णिम,करता विभोर हर पल

स्फूर्तिवान कण कण,जीवन की आस है सुन

उल्लासमय बसंत,सुरभित हुआ भुवन।


पुलकित तड़ाग दरिया,सुन्दर खिले कमलदल

मन में उछाह जागा,थलचर के दिल में हलचल

नभचर हुए मगन सब,पुष्पित हुए सुमन

उल्लासमय बसंत,सुरभित हुआ भुवन।


हिय को सुखद पवन,शीतल करे वो तन मन

गौरैया और बुलबुल,दें सबको नेह का धन

ऋतुराज का है आगम,ऋषिगण हुए मगन

उल्लासमय बसंत,सुरभित हुआ सुमन।



Rate this content
Log in