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Ram Chandar Azad

Others

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Ram Chandar Azad

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अंदर बाहर

अंदर बाहर

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घर में अंतर्द्वंद्व है, और बाहर मेहमान।

समझ नहीं आता मुझे कैसे करूँ बयान।।

कैसे करूँ बयान,भला वो क्या सोचेगा।

छवि धूमिल होगी गर उसको पता चलेगा।।

कहता है आज़ाद ये चर्चा व्याप्त नगर में।

आपस में बतियात कि अंतर्द्वंद्व है घर में।।


भनक न थोड़ी भी लगे, ऐसा करूँ उपाय।

शिकन न चेहरे पर दिखे, मिलूँगा मैं मुस्काय।।

मिलूँगा मैं मुस्काय, खबर उसे लगन न दूँगा।

राग-रंग और खान-पान में व्यस्त रखूँगा।।

कहता है आज़ाद पार जब होगा न ड्यौढ़ी।

सचमुच फिर तो उसे लगेगी भनक न थोड़ी।।


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