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Kalpana Misra

Others

5.0  

Kalpana Misra

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आवारा बादल

आवारा बादल

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इक बादल और इक बदली

घर उनका है नील गगन

बदली के चंचल नयनों में

हैं अश्रु भरी भीगी अनबन

बादल उड़ता संग हवा के

इधर - उधर बंजारा बन

गर्जन करता फिरता रहता

अंजान -गली आवारा बन


देख बादल का आवारापन

द्रवित हुआ बदली का मन

बदली बोली बादल से

तुम छोड़ दो ये आवारापन

हम -तुम दोनों साथ मिलें

बरसें घनघोर घटायें बन

बात यह भायी बादल के मन

बादल - बदली का हुआ मिलन

घनघोर घटाओं ने घिरकर

फिर खूब भिगोया धरती का तन।



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