बूढ़ा शेर
बूढ़ा शेर
मैं , बूढ़ा शेर
जंगल का राजा
कहते लोग मुझे
बब्बर शेर ।
कहने को मैं राजा
पर प्रजा मेरी कोई नहीं
प्रभु ने ऐसा बनाया है
इसमें मेरी कोई खता नहीं ।
मुझसे सब डरते हैं
फिर क्यों राजा कहते हैं
गर मैं हूँ सबका राजा
तो क्यों मुझसे डरते हैं ।
वन में , मैं रहता हूँ
वन्य प्राणी डरते हैं
इनसे तो मानव अच्छा
जो मुझसे दोस्ती करते हैं ।
मैं केवल नाम से नहीं
दिल भी शेरों जैसा है
मानव ने जो की दोस्ती
तो साथ मैने निभाया है ।
शेरावाली की स्वारी
रहता मानव हृदय में
जो मुझसे करे प्यार
देता उसको मैं सत्कार।
पता नहीं कब समझेंगें
ये जंगल के निरीह प्राणी
चाहता हूँ सब साथ रहें
पाएँ एक ही ताल का पानी ।
मानव ने बन दोस्त मेरा
मेरे संरक्षण का बीड़ा उठाया
मेरी प्रजाति वृद्धि के लिए
नित नए प्रयास किया ।
मानव हो या जानवर
प्रवृति होती अलग-अलग
अगर दिल से करो प्रयास
दोस्ती हो सकती बेखबर।
आसपास की खामोशी
अब काटने दौड़ती है
कोई पास नहीं फटकता
प्रभु से शिकायत होती है।
कहां तक सुनाऊँ
अब अपनी ये आत्मकथा
एकाकी जीवन से थक गया हूँ
अब मजे करना चाहता हूँ ।
इंतजार है अब किसी शेर दिल का
जो संग अपने मुझे ले जाए
मेरे करतब को दिखा लोगों को
मेरा व अपना पेट भर पाए।
