आसमां की परी
आसमां की परी
1 min
240
ईक परी उतरी
आसमां से
मेरे आँगन में,,
खुशी से भरी
जरी से सजी
लहरा कर उसने
यहाँ और वहाँ
भर दी खुशी
कोने कोने के
मेरे आँगन में,,
बन गई जीवन
पल भर में
झपकते ही पलक
वह कोमल
खिलखिलाती कली
जो है ईक
सुख बांटती तुझे
मुझे यह मिश्री की
मीठी कोमल डली
मेरे घर के आँगन में,,
राग राग तरंग रागिनि
बहलाता हर मन
सुन सके गर
उसकी सजी जीवन
से उसकी गुुनगुन,
नवजीवन की लङी
उतरी आसमां से
मेरे आँगन में
वह हसीन परी।।
