आरजू
आरजू
अरमानों की बगिया में,
मेरी आरजू का फूल खिला है,
मुद्दतों बाद मेरे दामन में,
मेरी खुशियों का चमन महका है,
अब तक चहक रहा था घर
जिसके चिलमन से,
उसी की विदाई की घड़ी आई है,
कैसे सुनाऊँ मैं अपनी जुबानी,
मैं खुश हूँ या हूँ विह्वल,
मेरे जिगर के बिछड़न
की घड़ी आई है.......
दुआ है मेरी तू खुश रहे हमेशा,
जन्नत की बगिया में तू महके हमेशा,
मिल जाए तुझे भी अपना किनारा,
वो घर भी हो तेरा सवेरा,
स्नेह की बगिया में तू चहके हमेशा,
हो जाए मेरी भी पूरी तमन्ना,
हो तेरी दुनिया में उजाला हमेशा,
आशाओं के रौशन की
ऐसी महफ़िल सजाई है....... ।।
