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Dr.Rashmi Khare"neer"

Others

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Dr.Rashmi Khare"neer"

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आंगन

आंगन

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एक आंगन छोड़ कर

दूसरा आंगन में जिंदगी

ढूंढती हुई

अपने वजूद को रखती मैं

अपना सर्वस्व न्योछावर

करने की कोशिश

रिश्तों के जाल में बंधती

मैं मैं मैं सिर्फ मैं


सब जगह खुद को देखती

हर रिश्ता मेरे लिए

महत्व रखता हुआ

मेरा ही घरौंदा

लेकिन पराई हूं

ये कहकर

मेरा हर टूटता सा

मुझे दिखता


बालों में चाँदी आ गई

आज भी मैं पराई हूं

सब की अपनी कब होंगी

मेरा आंगन कब होगा

क्या हमेशा ऐसे ही

पराई रहूँगी



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