आज की आवश्यकता
आज की आवश्यकता
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आज की आवश्यकता
बन गयी है मेरी कविता
सफलता कदम चूमे
प्रसन्नता से मन झूमे
धन की हो बौछार
हर दिन हो त्यौहार
मन की हो हर व्यवस्था
आज की आवश्यकता
हर महफ़िल में हो राज
सबसे ऊपर मेरा ताज
मुझसे आगे कोई न आज
मुझसे ही बने सबका काज
मेरा कहा ही हो नैतिकता
आज की आवश्यकता
लो सबको लगा ये अटपटा
पर सबका मन रहा है छटपटा
शायद जब तक रहेगा ये जान
कायम रहेगा ये झूठा अभिमान
आयेगा कैसे सत मानवता
आज की आवश्यकता।
