आई वर्षा
आई वर्षा
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अहा आई बरसाती बहार
हुआ सुखी सकल संसार
नहीं पानी का आर-पार।
गगन में छाया घनघोर
भर गया पानी चारों ओर
खुशी से मेंढक मचाए शोर।
अब गर्मी ही नहीं है त्राह
नहीं गर्म कपड़ों की चाह
बड़े प्यारे ये बरसाती माह।
खेतों में छा गई हरियाली
हवा के झोंको से हिलती जब बाली
किसान के चेहरे पर छाती खुशहाली।
