आघात सत्य का
आघात सत्य का
1 min
248
कुछ
सत्य के
अघात अप्रत्याशित होते हैं ,
तीव्र पीड़ा असीम हो उठती है।
क्षण में ही
सब सुन्दर छल
नाचते हैं आँखों के सामने
अपने विकृत वास्तविक स्वरूप में ।
आहत
क्षत हृदय
नयन नीरमय
आकुल प्राण
विह्वल हो चाहते हैं
तुरन्त आलिंगन परम सत्ता का।
