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Ambuj Pandey

क़लमकार से कवि की ओर निरंतर अग्रसर।

  Literary Colonel

अब अपने मन की सुन लो।

Abstract

कब तक बने रहेंगेे अर्जुन कब तक कृष्ण सिखाएंगे, चल उठें बने हम कर्ण स्वयं का रण चुन रण में जाएंगे,...

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माँ

Abstract

इस दोज़ख में वो एक जन्नत है, तू मेरी पहली मुहब्बत है।

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एक कविता

Others

एक अरसा पड़ा सींचना पर उग गयी मेरी बोई कविता, कवि ने ऐसा क्या कह डाला कि सिसक सिसक रोई कविता

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बचपन

Drama

काश हमे फिर से मिल जाये दिन वो अपने बचपन का।

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व्यथा - सच की

Drama Tragedy

हाँ मैं सच हूँ मैं बचा हुआ हूँ बस कुछ एक विचारों में, ना आऊं चलचित्रों में न पाता अखबारों में,

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शायद

Others Romance

'तुम्हारी कोई अहमियत नही बची है आंखों में, मेरी नजर-ए-मकान से तुम उतर गए हो शायद।' प्रेमिका से खफा प...

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आईना

Drama

मैं जितनी दूर आईने से, वो उतने पास सा था...!

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तुम मेरी बेटी नहीं हो

Crime Drama

अब तुम ही, कह दो छः महीने, की है उसका, क्या छिपा लूँ...!

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