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माँ तेरी साड़ी का किनारा
माँ तेरी साड़ी का किनारा
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© Sakhi Singh

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माँ तेरी साड़ी का किनारा
इसमें समा गया है माँ
विस्तरित आकाश ये सारा
कितने रिश्ते गुंथे हुए है
इसके कच्चे धागों में
इसके हर एक धागे से
मिलता है मजबूत सहारा
माँ तेरी साड़ी का किनारा,

एक छोर से दूसरे छोर तक
प्यार ही प्यार समाया
इसके धागों से मिलकर
माँ का आंचल कहलाया
माँ का आंचल जिस से
बहती है ममता की धारा
इसमें जैसे समा गया
माँ कोई सागर सारा
माँ तेरी साड़ी का किनारा,

ये धाराये हँसती है माँ
तेरे आंचल के सागर में
जैसे किसी ने अमृत रस
भर दिया माँ के आंचल में
सूरज की किरने बिखरी
बिखरी है चाँद की शीतलता
बिजली की है कौंध भी इसमें
है इसमें जल की निर्मल धारा
माँ तेरी साड़ी का किनारा,

इन्द्रधनुष के रंग भरे है
रंग भरे जो जीवन में
एक प्यार की लहर उठे है
सबके लिए इसके तन में
शहद की मिठास भरी हुई
माँ तेरे लाड दुलार में
खुशियों का अम्बार लिए है
माँ आशीर्वाद तुम्हारा
माँ तेरी साड़ी का किनारा,

माँ की साड़ी का किनारा
रखता है कितने मायने
एक लक्ष्मण रेखा तय है
नारी किनारे की आड़ में
इसकी मर्यादा जो लांघे  
वो है पापी इस संसार में
इसी किनारे में रहता है
सुरक्षित परिवार हमारा
माँ तेरी साड़ी का किनारा |

 

माँ माँ की साड़ी सखी

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