Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
 मेरे घाव नही भरे
मेरे घाव नही भरे
★★★★★

© Monika Agarwal

Others

1 Minutes   6.6K    5


Content Ranking

दिन बदल रहे हैं और साल भी

मौसम बदल रहा है और एहसास भी

धीरे धीरे बहुत कुछ बदल रहा है…

लोग भी…रिश्ते भी…पर

हम अनाड़ी...

वैसे के वैसे रह गए

नहीं बदल पाए खुद को

अजीब से हैं ये ज़ख्म

दिखते भी नही, पर

ये मत समझिए

कि दुखते नही!

दोस्त समझो जिसे

वो फरिश्ता भी हो सकता है

और दुश्मन भी

अजीब से हैं ये रिश्ते

अमृत समझो जिसे

वो ज़हर भी हो सकता है

और ज़हर जो लगे

वो अमृत भी हो सकता है

इश्क़ की दुनिया है जनाब

यहाँ कुछ भी हो सकता है!

अपनो के दिए घाव है

जो अब तक हरे हैं

बात बस इतनी सी है कि,

अब “तुम ” ही

"तुम" से नहीं रहे

और मेरे घाव नही भरे।

अजीब ज़ख्म

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..