STORYMIRROR

shobha jadhav

Others

3  

shobha jadhav

Others

मृदंग पाऊस सरी

मृदंग पाऊस सरी

1 min
323

मृदंग पाऊस सरी 

मन माझं वेड करी 

थेंब मोतियाचा परी 

झेलते ओंजळीवरी...!


चिंबचिंब पावसात 

भिजे पाखरे रानात 

ढग ढोल वाजवत 

नक्षी विजांची नभात...!


हिरवा शालू लेऊन 

दिसे धरती खुलून 

झाडवेली बहरून 

फुले ,फुलकळी ,पान...!


गंध हा ओल्या मातीचा 

धुंद फुलोरा मनाचा 

वारा बेभान जोराचा 

देई गारवा सुखाचा...!


मयूरपंख फुलत 

नाचतो मोर रानात 

सप्तरंग उधळत 

इंद्रधनू चमकत ...!


नभ पांघरुनी मन 

जाई शिंपीत चांदणं

श्रावणसरी झेलून 

हसे उगी शहारून...!


भिजत हिरवं रान 

ओलं चिंब होई मन 

या थेंबांत विसावून 

जा जगास विसरून...!


साहित्याला गुण द्या
लॉग इन