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Deepali Mathane

Others

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Deepali Mathane

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गाव माझा (अभंग)

गाव माझा (अभंग)

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गावकरी माझा। भजनात दंग

सावळे श्रीरंग। रूप हासे।।१।।


गोमाय अंगणी। घरोघरी दिसे

श्रध्दाभाव वसे। तिच्या ठायी।।२।।


शेणाच्या सड्याने। अंगण सजले

रंगात भिजले। रांगोळीच्या।।३।।


दही-दूध-लोणी।सुख-समृद्धीची

वार्ता सन्नीतीची। गावोगावी।।४।।


आजी-आबासवे। राबती शेतात

वसा दिन-रात। घेतलासे।।५।।


घरकुल हासे। एकत्र नांदून

थोरांसी वंदून। घरी-दारी।।६।।


दुःखाचे आहेर। वाटूनीया घेती

धावूनीया येती। संकटात।।७।।


पिंपळाच्या पारी।भरे पंचायत

आजता-गायत। हीच प्रथा।।८।।


ज्ञानज्योत लावी। शिक्षणाची कास

अभ्यासाचा ध्यास। बालकांसी।।९।।


धरण तुडुंब। पाणी अडवूनी

शेतीत सोडूनी। मळा पीके।।१०।।


गावाकडे चला। थोर लोक सांगे

फेडू चला पांगे। गावाचीया।।११।।


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