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माँ-बाप दोस्त अंत तक निभाए वही प्रेम का "सुपात्र " होता है। जो बीच राह में छोड़ दे ख़ुशी सालों उसे पूर्णतः उसका जीवन से चले जाना ही बेहतर जिससे कि "सुपात्र " के लिए स्थान रिक्त हो सके। जो प्रेम और सच्चे समर्पण का मोल समझे मीठा कमल उठो पापा इंतजार मन शब्द किस्मत दरवाजा डर शादी कवि

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