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चले गए... वो हमको खाक करने आये थे उस ज़माने में अंतर्जातीय विवाह को मान्यता नहीं दी जाती थी अपने आज तक एक साथ आते थे वो भी शोले फ़िल्म ग़ब्बर सिंह काशी इस ज़माने में पैदा हुए होते नारी सशक्तीकरण रेप रेपिस्ट्स सब बिखर गया शत्रुघ्न सिन्हा मेरे क्या दिन ही थे ? बच्चे ख़ामोश पहला प्यार घर में सबसे छुपके बातें करते थे वो हमको राख करके चलें गए मम्मी साथ

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