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Anita Sharma

Others

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Anita Sharma

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ससुराल की दिवाली

ससुराल की दिवाली

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"मम्मी दिवाली आ रही है मुझे तो बहुत डर लग रहा है मैं कैसे सारा काम करूंगी,,

"सब हो जायेगा बिटिया तुम अपनी भाभी की तरह ही पहले से ही काम करने लगो ताकि समय रहते सब निपट जाये।,,

"मां भाभी का सोचकर ही तो डर लग रहा है जब पहले में दिवाली की छुट्टियों में कॉलेज से घर आती थी तब देखती थी कि भाभी की हालत कितनी खराब हो जाती थी काम करते - करते उनके चेहरे की तो जैसे चमक ही चली जाती थी पूरा त्योहार उनका दर्द की गोलियों और उदास चेहरे में ही निकल जाता था।मम्मी मैं वैसा त्योहार नहीं मनाना चाहती मैं तो अपनी पहली दिवाली अपनी ससुराल में बहुत धूम धाम से मनाना चाहती हूं।,,

"बिटिया अब बहू बनी हो तो काम तो करना ही पड़ेगा भला ससुराल में ऐसा कहां होता है कि कुछ करना ना पड़े।अब मैं तो बस यही कहूंगी कि धीरे-धीरे ही सही पर काम निपटा ही लो सारा ताकि तुम्हारी सास को तुमसे कोई शिकायत न हो,,

कुछ महीनों पहले शादी होकर आई निधि ने दिवाली के पास आने पर साफ सफाई के काम से परेशान होकर अपनी मां को फोन किया तो उसकी मां ने उसे समझा बुझाकर फोन रख दिया क्योंकि उन्होंने भी यही किया था और उनकी बहू भी तो यही करती थी।पर निधि पहले घर से बाहर रहकर पढ़ाई करती थी और जब छुट्टियों में घर आती तो मां और भाभी का प्यार इतना होता कि उसे कुछ करने ही नहीं देती।फिर भी अगर वो अपनी जबरदस्ती से भाभी की कुछ मदद करती तो वो काम ऊपर ऊपर का थोड़ा बहुत ही होता पूरी जिम्मेदारी तो उसने कभी ली ही नहीं थी।

पर ससुराल तो ससुराल होता है यहां तो हर काम की शुरू से लेकर आखिरी तक जिम्मेदारी लेनी होती है।वैसे तो घर में पति ससुर के साथ सासो मां भी है पर उसकी मां ने ही जब कभी भाभी का हाथ ही नहीं बटाया था तो वो कैसे उम्मीद कर सकती थी कि उसकी सास उसका हाथ बटायेगी । इसीलिये उसे दिवाली जैसे बड़े त्योहार की जिमेदारी लेने से डर लग रहा था।पर डरने से होता ही क्या काम तो करना ही था इसलिये उसने कल से ही काम शुरू करने का सोच लिया और सुबह जल्दी उठकर रसोई का काम निपटा अपनी सासो मां से "सफाई किधर से शुरू करू" ये पूंछने चल दी।

सासो मां से उसके ये सवाल करते ही उन्होंने बड़े प्यार से उसे अपने पास बिठाते हुऐ कहा......

"अरे बहू तुम इतना परेशान क्यों हो रही हो सब हो जायेगा हम दोनों मिलकर कर लेंगे न और फिर तुम्हारे ससुर जी और मेरा बेटा वो भी तो मदद करते है हरबार तो इसबार भी करेगें।,,

सासो मां की बात सुनकर निधि तो आश्चर्य चकित रह गई क्योंकि उसे तो एसी कोई उम्मीद ही नहीं थी।पर सासो मां ने सिर्फ ये सब कहा नहीं था उन्होंने पूरी ईमानदारी से वो सब किया भी था सभी के साथ मिलजुल कर हंसते मुस्कराते कब सफाई अभियान खत्म हो गया निधि को पता भी नहीं चला।सबकी मदद की वजह से सफाई के बाद उसके पास बहुत समय बच गया जिसे उसने अपने क्रियेटिव माइंड को देकर उसने नई नई चीजों से अपने घर को सजाया।

ये सब देखकर सासो मां उसकी तारीफ करते करते नहीं थक रहीं थीं।जिससे उसका उत्साह दोगुना हो रहा था थकान तो जैसे बिलकुल थी ही नहीं ।इस खुशी और उत्साह में भी उसे बार बार अपनी भाभी की याद आ जाती... वो भी तो कितना काम करतीं थीं पर शायद ही है की कभी उसकी मां ने उनकी तारीफ की हो उल्टा इधर उधर काम देखकर उनसे चिल्लाती ही रहतीं थीं कि.....

"बहू अभी ये नहीं हुआ बहू अभी वो नहीं हुआ न जाने कब काम पूरा होगा ?,,

 या यूं ताना मारतीं कि "अभी मत करो ये सब दिवाली के बाद कर लेना क्या जरूरत है अभी कुछ भी करने की अभी तो तुम आराम कर लो।,,

ये सुनकर बेचारी भाभी कैसे बिना कुछ कहे सुने काम में लग जाती थीं ।न जाने क्या बात थी कि वो कभी मां से पलट कर कुछ नहीं कहतीँ थीं।पर क्या उनका मन नहीं करता होगा कि इतने काम करने के बाद कोई उनसे प्यार से बोले कोई उनकी थोड़ी सी परवाह करें।किसी के कहने भर से ही आधी परेशानी दूर हो जाती है ।

निधि इसबात को अभी कुछ दिनों में अच्छे से महसूस कर चुकी थी। इसलिये वो शायद अपनी भाभी की खामोशी के पीछे का दर्द भी समझ चुकी और इससब में खुदको भी कसूरवार समझ रही थी क्योंकि उसने काम तो किया था भाभी के साथ पर पता नहीं क्यों उसने अपनी मां को कभी नहीं रोका था भाभी के संग गलत व्यवहार करने से।रोकती भी कैसे शादी से पहले उसे भी तो यही लगता था कि बहुओं के साथ ऐसा ही व्यवहार होता होगा तभी तो उसे अपनी ससुराल में इतना डर लग रहा था।पर उसे तो अभी पता चला था कि ससुराल में बहुओं को भी सम्मान मिलता है।

अपनी गलती समझ आते ही निधि ने अपनी मां को फोन लगाया....

"हैलो मां आप इसबार मेरे कहने से भाभी का थोड़ा हाथ बटाइये भाभी के साथ थोड़ा प्यार से पेश आइऐ और हां भैया को भी समझाइयेगा कि शादी का मतलब अपनी बीबी पर हुक्म चलाना नहीं बल्कि उनका ख्याल रखना और हर कदम पर साथ देना होता है।देखना मां ऐसा करने से अपने घर पर जो त्योहार में उदासी छाई रहती है वो कैसे दूर होती है।,,

उस समय तो मां ने अनमने ढंग से हां बोल दिया पर फिर भी बेटी की बात मानकर उन्होंने वहीं किया ।दिवाली वाले दिन भाभी की वीडियो कॉल आई...

"हैलो दीदी दिवाली की बहुत शुभकामनाएं आपको"

पहली बार दिवाली पर भाभी का फुलझड़ी सा चमकता मुस्कुराता चेहरा बता रहा था कि इसबार उसके मन से ही नहीं भाभी के मन से भी ससुराल में दिवाली के समय काम का बोझ और डर दोनों खत्म हो गये ।



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