Uma Vaishnav

Others


4.3  

Uma Vaishnav

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फ़िक्स डिपाॅजिट

फ़िक्स डिपाॅजिट

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शर्मा जी सुबह से तैयारियों में लगें हैं आज उनकी बेटी को देखने लड़के वाले जो आ रहे हैं,शर्मा जी की पत्नी भी तैयारियों में जुटी हुई थी। पलग पर नई चादर लगाई। सोफा के कवर बदले और फूलदान के फूल भी बदले। श्रीमती शर्मा रसोई में जाकर देखती है नाश्ते का सारा इंतजाम ठीक से हैं कि नहीं।

वो अपने बहू से कहती हैं  नाश्ते की सारी तैयारी हो गई। वो कहती हैं।। हाँ, सब तैयारी हो गई है। आप बस सुरभि को देख आये। वो तैयार हुई या नहीं।। लड़केवाले बस अब आते ही होगें। श्रीमति शर्मा अपनी बेटी सुरभि के कमरे में जाकर देखती है वो भी तैयार थी। तब दरवाजे की बेल बजती है श्रीमति शर्मा :- लगता है लड़केवाले आ गये हैं, सुरभि मै बुलाऊँ तब नीचे आजाना।। हे भगवान। आज ये रिश्ता हो जाये। बहुत बड़े घर से रिश्ता आया है शर्माजी दरवाजा खोलते हैं, सामने श्रीमान मेहरा और उनका परिवार था।

शर्मा जी :- आये  आये  मेहरा जी। शर्माजी सभी को अंदर बिठाते हैं ,तभी बहू पानी के गिलास का ट्रे लेकर आती हैं, फिर थोडी आपसी बात - चित के बाद सुरभि चाय की ट्रे लेकर आती है, सुरभि सब को प्रणाम करती है,और सामने शेखर(सुरभि को देखने आये लड़का) के पास वाली कुर्सी पर बैठ जाती है। श्रीमति मेहरा अपने बेटे की तारीफों के पुल बाँधती है, और कहती हैं। मेरा बेटा लाखों कमाता है। कई रिश्ते आये। पर इसे कोई पसंद ही नहीं आई। अब आपकी बेटी पसंद है या नहीं ये ही जाने तभी शेखर। बोल पड़ता है 

मुझे पसंद हैं,। ये सुनते ही सब के चहरे पर खुशी की लहर दौड़ जाती है। तभी श्रीमति मेहरा कहती हैं । अब कुछ जरूरी बात हो जाये। वैसे तो हमें कुछ नही चाहिए भगवान् का दिया सब कुछ हैं और शेखर भी बहुत कमाता है। पर वो क्या हैं कि आपकी बेटी हमारे घर आ रही हैं। तो उसकी जिम्मेदारी भी। बढ़ जाएगी।

और खर्च भी  तो हम तो इतना चाहते हैं। कि आपकी बेटी को कोई कमी नहीं आये तो  ज्यादा नहीं तो कमसे कम 50 लाख रुपये फ़िक्स डिपॉजिट करवा दीजिए। वैसे सक्सेना जी की बेटी का रिश्ता भी आया हुआ है। वो तो 60 भी देने को तैयार है  लेकिन हमारे बेटे को तो आपकी बेटी पसंद आई हैं। कुछ देर के लिए माहोल बिल्कुल शांत हो जाता है, श्रीमती शर्मा उदास आखों से। शर्माजी के सामने देखती हैं।

शर्माजी चुप चाप सर झुका लेते हैं। तभी सुरभि बोल पड़ती है।माजी अपने ठीक कहा। शादी के बाद मेरा खर्च भी बढ़ जाएगा। शेखर जी अकेले कैसे उठाएगे। इसका एक हल हैं। शादी के बाद शेखर हमारे साथ हमारे घर रहेगें। उनका खर्च भी बच जाएगा। और हाँ। उनको यहां रहने के लिए कोई फ़िक्स डिपॉजिट की भी आवश्यकता नहीं होगी। सुरभि की बात सुनते ही श्रीमति मेहरा भड़क जाती हैं ऎसा भी कभी होता है। यहां कैसे रह सकता है। सुरभि।।जैसे मै आपके घर रह सकती हूं । क्युकी आपको मेरा खर्च वहन नहीं होता  इसलिए। हम इनका खर्च वहन कर लेगें। और वो भी बिना किसी हरजाने के। अगर आपको मंजूर हो तो हां वरना। नमस्कार


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