Swati Rani

Children Stories


4.3  

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निश्चल प्रेम

निश्चल प्रेम

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लाॅकडाऊन का शमा था, स्वीटी एक रईस परिवार कि कुतिया थी! जैसे परिवार के सब सदस्य कोरोना के डर से रोज साबुन और गर्म पानी से नहाते , वैसे स्वीटी के भी साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता और हो भी क्यों ना कामिनी और सुरेश की कोई औलाद भी तो नहीं थी, स्वीटी ही उनकी सब कुछ थी! 

रोज नहा कर कामिनी स्वीटी के सफेद बाल बनाती और उसे बढिया-बढिया चीजे खिलाती! गली के दुसरे कुत्ते स्वीटी से जलते कि पता ना कौन सा नसीब ले कर पैदा हुयी है ये!

वहीं उनके गली में एक आवारा कुत्ता रहता था, सैन्डी लाॅकडाऊन में मनुष्यों में भुखमरी थी तो कुत्तो को कौन पूछ रहा था! पहले होटल वगैरह के बचे-खुचे मांस से सैन्डी का पेट भरा रहता था, पर लाॅकडाऊन में उसकी सेहत गिरते जा रही थी! बस ढाचा मात्र रह गया था उसका!

स्वीटी कभी-कभी अपने घर के लाॅन में घूमती क्योंकि लाॅकडाऊन में उसे घुमाने बाहर नहीं ले जा पाते थे , तो सैन्डी उसको कातर निगाहों से देखता था और आंसू बहाते हुये कुछ कहता था! रात-रात भर भूख से चिल्लाता और रोते रहता था!

वैसे ये पहली बार नहीं था, स्वीटी और सैन्डी कि आशिकबाजी मोहल्ले में सबको पता थी, बहुत बार दोनो एक दूसरे को लाॅन के बाउंड्री पर चढ कर चांटते हुये और अपने शब्दों में कुछ कहते हुये पाये गये थे!

सैन्डी की ये हालत स्वीटी से देखी नहीं जा रही थी, एक दिन वो खुली रह गयी तो दौड़ के उसने अपनी रोटी सैन्डी को दे दी! सैन्डी लपक कर खाने लगा!

अब ये रोज का सिलसिला हो गया, स्वीटी रोज 2 रोटी सैन्डी को भी देने लगी ! अब मोहल्ले वाले भी खुश थे क्योंकि उनको रात में सैन्डी के रात में चिल्लाने कि आवाज नहीं आती थी और वो शांति से सो पाते थे!

एक दिन एक स्कुटर ने सैन्डी का पैर कुचल दिया, जिससे सैन्डी काफी दुखी रहने लगा और स्वीटी भी उसकी हालत देखकर रोते रहती थी दिन भर! पर यहाँ इंसान- इंसान को नहीं पुछ रहा है आज के कलयुग मे तो गली के उस आवारा कुत्ते को कौन पुछे!स्वीटी की ये हालत देखकर कामिनी समझ गयी उसकी ये हालत सैन्डी को देखकर हुयी है आखिर समझे भी क्यों ना बेटी जैसे मानती थी उसे!

कामिनी के कहने पर सुरेश ने नगर पालिका को फोन करके सैन्डी को जानवर के हास्पिटल में भर्ती कराया, तब जा कर उसका पैर ठीक हुआ, सारा खर्च रमेश ने वहन किया!जैसे नगर पालिका वालो ने सैन्डी को वापस ठीक करके छोड़ा स्वीटी दौड कर गयी और वो दोनों एक दूसरे को चाट-चाट कर रोने लगे!

कामिनी हतप्रभ खडी दोनों के निश्चल प्रेम को देख रही थी!



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