मेरे मुन्ने ने खा लिया तो
मेरे मुन्ने ने खा लिया तो
" तुम भी ना... हमेशा बच्चों के लिए सोचती हो। कभी अपने बारे में भी तो सोचो।.जरा हमें भी अभी तो बताओ कि तुम ही क्या पसंद है !"
राकेश जब भी नीलिमा मां से अपने कुछ लेने के लिए कहता तो वह कहती...."पहले मेरे बच्चे के लिए गिफ्ट लाओ.....!"और उनमें यही नोकझोंक हमेशा चलती रहती थी आज भी ऐसा ही कुछ हुआ..!
"मैं तभी यह गिफ्ट लूंगी जब आप रॉनित और नव्या के लिए भी कोई गिफ्ट लाओगे। मैं एक माँ हूँ, तो मेरा पहला कर्तव्य यही है ना कि मैं सबसे पहले अपने बच्चे के बारे में सोचूं!""अरे , नीलिमा ! मैं बच्चों के लिए भी कुछ ले आऊंगा,पर यह गिफ्ट मैं तुम्हारे लिए लाया हूं तो इसे तुम लो ना। मैं तुम्हें इतना प्यार करता हूं। कम से कम मेरी भावना को तो समझो!"बड़े प्यार से पैकेट खोलकर उसमें से साड़ी निकालकर नीलिमा को ओढ़ाते हुए राकेश ने कहा।"ऑफ्फोह! मुझे और बहस नहीं करना है, मैं बोल देती हूं कि...."इफ यू लव मी देन यू सुड लव माई किड्स फर्स्ट""ओके ओके मदर इंडिया! अब तो जरा वह साड़ी पहनकर दिखाओ। ये बंदा कबसे तुम्हारा मुंतजिर बना हुआ है। अपनी एक झलक दिखाओ तो सही!"उस वक्त नीलिमा राकेश की बात मानकर साड़ी ट्राई करने अंदर चली गई।इधर राकेश सोचने लगा कि कैसा होता है एक माँ का मन कि अपनी खुशी से पहले अपने बच्चे के बारे में सोचती है।राकेश शादी के शुरुआती दिनों वाली नीलिमा को याद करने लगा तब याद आया कि,यही नीलिमा थी जो पहले हमेशा लड़ झगड़ कर गिफ्ट लिया करती थी और तुरंत नए-नए ड्रेसेस पहन कर दिखाने आ जाती थी। और आज बच्चों के लिए कुछ नहीं लाया तो उसके लिए उस गिफ्ट का कोई मायने ही नहीं है।कैसी हो गई है नीलिमा?
कोई लालच नहीं कोई शौक नहीं।क्या माँ बनते हैं स्त्रियों का अपने प्रति शौक और अपने प्रति प्रेम खतम हो जाता है...?अक्सर ऐसा होता है कि माँ बन जाने के बाद यह एक अलग बदलाव आता है स्त्रियों में कि सबसे पहले वह अपने बच्चों के बारे में सोचती हैं।और.....माँओं के साथ एक कंडीशन एप्लाइड है कि"अगर मुझे प्यार करते हो तो मुझसे पहले मेरे बच्चे को भी अपनाना होगा। उसे प्यार करना होगा !"
कोई चाहे स्त्री को कितना भी प्यार करे। पर ज़ब वह माँ बनती है तब इस बात पर बड़ा गौर करने लग जाती है कि कौन उसके बच्चों को सच में प्यार करता है और कौन नहीं। अगर कोई उनके बच्चों को प्यार नहीं करता तब वह उन्हें पसंद भी नहीं करती हैं। भले ही एक माँ भूखी रहे लेकिन अगर उसके बच्चे को खिला दिया जाए तो उसका भी पेट भर जाता है।
उनके मुंह से अक्सर सुनने को मिल जाएगा अगर मेरे मुन्ने ने खा लिया तो बस कोई बात नहीं।भले ही एक स्त्री मुँह से कुछ ना कहें पर उन्हें ना तो अपने बच्चों की बुराई सुनना बिल्कुल पसंद नहीं और ना ही बुराई करनेवाला।तो..... प्रिय पाठकोंमाँओं के सामने उनके उसके बच्चे की बुराई कभी करें तो सोच समझकर करें।
वरना माँ तो अपने बच्चे को प्यार करती रहेगी। हाँ, आपका पत्ता ज़रूर कट सकता है।
क्योंकि माँएं दिखाती नहीं पर याद रखती हैँ कि फलाने ने मेरे बच्चे की बुराई की थी।वो... मैंने आपको शुरू में ही कह दिया था ना कि माँ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से यही कहना चाहती हैं कि....."इफ यू लव मी देन.....!"
बाकी तो आप खुद ही समझदार हैं।
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और आपके सौजन्य और प्रोत्साहन से मेरी लेखनी चलती रहे निर्बाध.... निरंतर...!
