प्रीति शर्मा

Others


4.5  

प्रीति शर्मा

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मां

मां

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मम्मी हमारी यादों में तुम हर पल रहती हो।जैसे दिल की धड़कन सांसों में रहती है।।

  

मम्मी को गये आज पांच साल हो चुके हैं और आज मम्मी का 75 वां जन्मदिवस है।हम सब उन्हें याद करते हैं।याद करते ही एक साथ यादों की बहुत सारी खिड़कियां खुल जाती हैं।हर खिड़की से एक अलग रोशनी आती है,ताजी हवा आती है जो फिर से एक नई जिंदगी दे जाती है।

मम्मी की यादें ऐसी ही हैं,जैसे जीवन के लिए हवा का जरूरी होना,रोशनी का होना,एक चेतन तत्व का होना।जब थीं तब कभी इतनी तीव्रता से एहसास नहीं होता था क्योंकि तब वो थीं तो कभी सोचा ही नहीं था। जब छोड़ कर चली गई तो इस एहसास का पता लगा कि मां होना क्या होता है??? और बेटी होना क्या होता है? वास्तविक रूप से तभी पूर्ण रूप से पता लगा उनके होने और ना होने का एहसास!

बस इतना ही है कि वह शारीरिक रूप से हमारे पास नहीं है लेकिन आत्मिक रूप से, मानसिक रूप से वह हमारे साथ ऐसे ही रहती हैं जैसे हम ईश्वर की कल्पना करते हैं।     वास्तव में इस सांसारिक जगत में मां साक्षात ईश्वर के समान ही होती है और जब वह चली जाती है तब भी ईश्वर की तरह ही मानसिक रूप से हमारे साथ रहती हैं।यह हमारे भाव हैं, हम महसूश करना चाहते हैं या नहीं। हम विश्वास करते हैं या नहीं, हमारी श्रद्धा उनके प्रति है या नहीं, इसी भावना में सब समाया हुआ है। जीवन का सारा अस्तित्व और व्यक्तित्व इस आस्था और विश्वास पर ही टिका हुआ है।मानो तो भगवान ना मानो तो पत्थर!मानो तो गंगा मां हूं ना मानो तो बहता पानी।

शायद ही कोई दिन गया हो जब मां को भूली होऊं।वे ना होकर भी होने से ज्यादा महशूस होती हैं। हरपल यही लगता है कि वो यहीं कहीं आसपास हैं।लेकिन ना होने का अहसा़स जब भी दिल में घर करता है किसी किसी पल तो दिल दुखता है एक कसक एक खालीपन कहीं जैसे आकर बैठ गया हो जो कभी नहीं भरेगा। 

मां के जाने के बाद इन पिछले पांच वर्षों में जो भी रचनाएं लिखी वह मैंने संग्रहितकर एक साथ प्रकाशित कीं।उनमें से एक रचना यहां दे रही हूूँ। 

मां ----------

सिर्फ एक शब्द नहीं 

पूरा शब्दकोश है।

जो नहीं लिखा गया कहीं

वह व्याकरण है ।।

मां --------

सिर्फ एक रिश्ता नहीं

सारे रिश्तों का आधार है।

जो रचा भी नहीं गया अभी

संपूर्ण संसार है ।।

*****

मां------

सृष्टिकर्ता सारे जगत की,

कल्पना का सूत्रधार है।

परमात्मा का प्रत्यक्ष

साक्षात्कार है।।

*****

मां---------

एक अहसा़स है

जुड़ी है जिसकी सांसे ,

बच्चे की हर हरकत से।।

प्रेम में पगा-सा आभास है।।

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मां--------

साथ ना भी हो हर पल

फिर भी साथ है ।

है वह अदृश्य साया

सिर पर जिसका हाथ है ।।


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