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Uma Vaishnav

Others


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Uma Vaishnav

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माँ कभी सौतेली नहीं होती

माँ कभी सौतेली नहीं होती

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पायल और विजय अपनी खुशहाल जिंदगी जी रहे थे। उनका एक बेटा भी था । जिसका नाम रोनक था । वो आठ साल का था । बहुत प्यारा बच्चा है रोनक..... विजय को काम की वजह से परिवार के साथ समय बिताने को नहीं मिलता था। परंतु पायल को अपने पति से कोई शिकायत नहीं थी क्युकी वो जानती थी कि विजय कितनी मेहनत करता है, और वो ये सब अपने परिवार के लिए ही कर रहा है, पायल बहुत समझदार थी वो विजय और रोहन का बहुत ध्यान रखती थी।वो घर और बाहर का सब काम खुद ही संभाल लेती थी।बिजली के बिल से लेकर रोनक के स्कूल की फीस तक सारा काम पायल ही संभालती थी। इस लिए विजय भी निश्चिंत था।

परंतु होनी को कौन टाल सकता है,........ एक दिन जब पायल बैंक मे पैसे जमा करा कर वपास लौट रही थी तो अचानक एक ट्रक से टकरा जाती है, और उसका एक्सिडेंट हो जाता है,पुलिस उस ट्रकवाले को पकड़ लेती है, कुछ लोग पायल को अस्पताल ले जाते हैं, परंतु खून ज्यादा बह जाने से डॉक्टर उसे बचा नहीं पाते है, अब विजय पर तो जैसे दुखों का पहाड़ पड़ गया हो वो अपने आपको संभाल ही नहीं पाता है, उसकी हालत पागल जैसी हो जाती है, उसका दिल ये मानने को तैयार नहीं होता है कि पायल उसे छोड़ने कर चली गई। रोनक जब स्कूल से लौटता है, तो .. माँ.. माँ.. कहके... पुकारता है पर अब क्या...... अब माँ तो उसे छोड़ कर चली गई थी । उस मासूम की आँखे माँ को ही ढूंढ रही थी, परंतु उसे माँ कहीं नजर नहीं आ रही थी,घर में इतनी भीड़ देख रोनक घबरा जाता हैं......अपने पापा को यूँ रोते देख... उनसे पूछता है...... माँ.. कहा है?.... माँ को क्या हुआ.... बोलो पापा माँ कहाँ हैं.... पर विजय के पास उस मासूम के सावालों का कोई जवाब नहीं होता है

तभी रोनक की नजर आगन में सफेद चादर में लिपटी उसके माँ की लाश पर पड़ती है, रोनक तुरंत पायल के शरीर से लिपट जाता है.... और जोर जोर से रोने लगता है... "माँ.. माँ.. उठो ना.. माँ.. उठो... अब मै कभी शरारत नहीं करूँगा... खाना भी सही टाइम पर खउगा.... तुम उठो ना........ रोनक की ये हालत विजय से देखी नहीं जाती वो रोनक को अपने सीने से लगा लेता है..... और दोनों जोर जोर से रोने लगते हैं"

शामिल हुए कुछ रिश्तेदारों में से कुछ लोगों ने दोनों बाप - बेटे को सांत्वना दी...... और विजय को समझाया कि अब पायल के अंतिम संस्कार का समय हो गया है, विजय ने अपने आपको सँभाला और पायल को अंतिम विदाई दी.... अंतिम विदाई देते समय.... विजय के आखों के सामने पायल की एक एक बात याद आ रही थी... उसका वो चेरह बार बार आखों के सामने आ रहा था

अंतिम - संस्कार करके जब घर लौटा तो मानो घर खाने को दौड़ रहा था। बार - बार पायल की यादे सता रही थी। तभी विजय की एक दूर की रिश्तेदार ने विजय को समझाया कि वो अपनी भावनाओ को काबू में करे क्योकि अब उस पर रोनक की जिम्मेदारी भी आ गई है विजय उनकी बात को समझ जाता है और रोनक की देखभाल में लग जाता है ये बड़ा कठिन था उसके लिए.... क्योकि अब उसे रोनक को माँ और बाप दोनों का प्यार देना था।

रोनक को किसी तरह संभालता है, उसे खिलाता - पिलाता, नहलाता और स्कूल भेजता उसके सारे काम करता .. इस तरह एक महिना गुजर गया। अब तो विजय के ऑफिस से भी फोन आने लगते हैं, विजय की समझ नहीं आता है कि आखिर रोनक की देखभाल कौन करेगा।

तभी विजय के दूर की रिश्तेदार का फोन आता है, और वो विजय को सपना के बारे में बताती है:-

"सपना बहुत ही सीधी - साधी सामान्य परिवार से है, शादी के तीन साल बाद भी जब उसे कोई संतान नहीं हुई तो उसके पति ने अपनी माँ के कहने पर उसे तलाक दे दिया। वो अब अपने भाई - भाभी के साथ रहती है, पर वहा भी उसे अपनी भाभी के ताने सुनने पड़ते हैं, उसे भी एक सहारे की जरूरत है, और विजय को भी रोनक की देखभाल के लिए ऐसी ही किसी लड़की की तलाश थी। "

विजय सपना से मिलता है और अपने और रोनक के बारे में बताता है, विजय कहता है कि.... वो पायल को कभी नहीं भूल सकता.... और ना ही उसकी जगह किसी और को दे सकता है.... वो ये शादी सिर्फ अपने बेटे रोनक के लिए कर रहा है.......... सपना भी बच्चे के प्यार को तरस गई थी। वो भी चाहती थी कि उसे कोई मां कहकर पुकारने वाला कोई हो।

विजय, सपना से शादी कर उसे अपने घर ले आता है, और उसे रोनक से मिलाता है, पर रोनक सपना को देख कर खुश नहीं होता है, और भी उदास हो जाता है, विजय कहता है...... रोनक,.... ये तुम्हारी माँ हैं,

रोनक कहता है....... ये मेरी माँ नहीं, आपकी पत्नी होगी..... ये तो मेरी सोतेंली माँ हैं... ये बहुत बुरी है.... मुझे नहीं चाहिए ऐसी माँ...... रोनक इतना कह कर गुस्सा हो कर भाग जाता है...... सपना रोनक की बात सुनकर बहुत दुखी होती है.... उसकी आखों में आंसू आ जाते हैं

विजय कहता है, रोनक अभी छोटा है, उसे अपनी माँ को भुलाने में वक़्त लगेगा। मै बस इतना चाहता हूँ, कि तुम उसकी बात का बुरा नहीं मानोगी। और सब भुलाकर एक अच्छी माँ की तरहा रोनक की देखभाल करोगी।

सपना विजय की बात समझ गई थी। उसने तय कर लिया था कि वो रोनक के दिल में अपने लिए जगह बना कर रहेगी। सपना ने पायल की अलमारी खोली उसमें उसे पायल की डायरी मिली।

पायल को डायरी लिखने का शौक था। वो अपनी पूरी दिनचर्या अपनी डायरी में लिखा करती थी। यहां तक कि अपनी पसंद नापसंद और विजय, रोनक की भी पसंद - नापसंद के बारे में भी सब लिखा करती थी। सपना ने दूसरे दिन सुबह जल्दी उठ कर नहा - धोकर पायल की लाल रंग की कांजीवरम साड़ी पहनी जो की रोनक और विजय दोनों को बहुत पसंद थी.... पायल जब जब वो साड़ी पहनती विजय उसकी तारीफ किए बिना नहीं रहता रोनक को भी माँ की ये साड़ी बहुत पसंद थी, फिर उसने पायल का फ़ेवरेट रोज की भीनी भीनी महक वाला पर्फ्यूम भी लगाया

उसके बाद वो किचन में जाकर जल्दी से विजय का मन पसंद गोभी के पराठे और रोनक का मन पसंद चीज़ सैंडविच नाश्ते में बनाती हैं।

उसके बाद वो रोनक को जगा ने चली जाती है,रोनक को अपनी माँ पायल के अपने आसपास होने का अनुभव होता हैं और वह आंखो को मलता हुआ उठ जाता है, उठते ही उसकी नजर सपना पर पड़ती हैं, वो रोनक का बैग जमा रही थी उसका मुंह दूसरी तरफ था, पीछे से वो बिल्कुल पायल की तरहा दिख रही थी... इसलिए रोनक उसे अपनी माँ पायल समझ कर .. माँ .. माँ . कहता हुआ सपना से लिपट जाता है, सपना को भी रोनक का उसे यूँ लिपटना अच्छा लगता है जैसे ही वो उसे अपने गले लगने लगती हैं, तो रोनक को पता चल जाता है कि वो उसकी माँ पायल नहीं सपना हैं... तो वो फिर से उदास हो जाता हैं और सपना को गुस्से में कहता हैं......."चली जाए आप यहाँ से... आपने मेरी माँ की साड़ी क्यू पहनी हैं, आप मेरी माँ की किसी भी चीज को हाथ नहीं लगाएगी" और रोनक जोर जोर से रोने लगता है, तभी आवाज सुनकर विजय भी उठ जाता है और किसी तरह रोनक को चुप कराता है, सपना भी रोनक को सॉरी बोलती है... और वादा करती है कि आज के बाद वो कभी भी पायल की किसी भी चीज को नहीं छूएगी इतना कह कर वो तुरंत कपड़े बदल लेती है और रोनक और विजय के लिए नाश्ता लगाती है ।

इस तरह कई दिन बीत गए ।सपना रोनक और विजय का पूरा पूरा खयाल रखती ।अब तो दोनों को जैसे सपना की आदत हो गई थीं और होगी भी क्यू नही वो उनके कहने से पहले ही सभी काम कर लेती थी ।

एक दिन अचानक सपना को बहुत तेज बुखार आ जाता है, वो अपने पलग से भी नहीं उठ पा रही थी इधर रोनक के स्कूल जाने का वक़्त भी हो गया था पर उसका पूरा बदन बुखार से जल रहा था फिर भी वो किसी तरह उठ कर रोनक के लिए टिफिन बनाती है,और विजय को देती है,टिफिन बनाते ही उसे चक्कर आ जाता है और वो गिर जाती है विजय और रोनक तुरंत सपना की तरफ दौड़ते हैं ,विजय अपने फ़ैमिली डॉक्टर को बुलाता है ।

सपना का चेकअप कर के दवाई लिख देता है, विजय के पूछने पर डॉक्टर कहता है कि बुखार की वजह से कमजोर आगई है इसलिए चक्कर आ गया और दवा लिखदी है, वो दे देना और ध्यान रहे कम से कम दो - चार दिन पूरा बेड रेस्ट कोई भी काम नहीं कराना वरना उस की हालत और भी बिगड़ सकती हैं।

रोनक विजय और डॉक्टर की बातें सुन लेता है, और अपना बैग रख कर सपना के पास जाता है और सपना को पायल के अलमारी की चाबी दे कर कहता है... "आप जल्दी से ठीक हो जाये मैं कभी भी आप पर गुस्सा नहीं करूँगा ..... मैं एक माँ को खो चुका हूँ... अब इस माँ को नहीं खोना चाहता ।" रोनक की बात सुनकर सपना की आँखो में आँसू आ जाते हैं और वो रोनक को अपने गले से लगा लेती हैं।

इस तरह रोनक को फिर से मां मिल जाती है और सपना को भी रोनक के रुप में बेटा मिल जाता है ।



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