खोखली शान
खोखली शान
" बच्चों आज तुम्हें मैं खोखली शान ( झूठी ) शान की कहानी सुनाता हूँ."
सभी बच्चों ने एक साथ कहा "सुनाओ गुरु जी ।"
" तो बच्चों अभिया गाँव का एक लड़का जो साधारण से परिवार का था उसका नाम डेनिस था वह शहर पढ़ाई करने गया था वहाँ उसकी दोस्ती कक्षा में पढ़ने वाले रईस लोगों के लड़कों से हो गई है. वह शहर की चकाचौध व वैभवशाली जिन्दगी से भी बहुत प्रभावित हुआ. दोस्तों के साथ आए दिन बड़ी - बड़ी पार्टियों करना पैसा लुटाना उसकी आदत में शुमार हो गया था उसकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि वो बड़े लोगों की जीवन शैली मैनटेंस कर सके. वह अपने दोस्तों से झूठमूठ कहता था कि वह एक जमींदार का बेटा है. वह खोखली शान दोस्तों से बघारता था डेनिस को जो राशि एक माह खर्च के लिए घर से मिलती थी वह उसे एक ही दिन में लुटा देता था, अपनी झूठी शान बनाये रखने के चक्कर में | अतः अब पूरे माह का खर्चा कैसे चले सो वह चोरी करने लगा कभी चैन झपटना , तो कभी किसी की बाईक चुराकर बेच देता , कभी किसी का पाकिट मार देना ये उसकी आदतें बन गई थीं इन्हीं चोरियों के दम पर वह मँहगे - मंहगे शौक पूरे करता था पढ़ने में उसका बिल्कुल भी ध्यान नहीं रहता था । वह शहर जाकर पूरी तरह से आवारा लड़का बन चुका था । एक बार वह चोरी करते रंगे हाथों पकड़ा गया । अब तो उसकी खोखली शान का लोगों को व दोस्तों को पता चल गया उसका पूरा का पूरा कैरियर तबाह हो गया । अत : बच्चों खोखली शान नहीं बघारना चाहिए ।
शिक्षायें ( 1 ) हमें झूठी शान नहीं दिखाना चाहिए । ( 2 ) हमारी जितनी चादर हो उतने ही पैर पसारना चाहिए ।
