Shyam Raj

Children Stories


4.5  

Shyam Raj

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इंटरव्यू विथ शेर

इंटरव्यू विथ शेर

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कब से सोच रहा हूँ क्या से क्या हो गया..? आज कल शेर चीता नीलगाय बंदर सांभर इत्यादि जानवर शहर की सड़को पर दिख रहे हैं... मैं रिपोटर बिहारी लाल कल शहर के हालात जानने निकला ही था कि मेरी मुलाक़ात सामने से आते शेरो के एक झुंड से हो गई पहले तो वो मुझे देख कर डर गये क्योंकि मैं मास्क , हैंड गलव्स पहन रखा था... मैं भी उनको देख कर डर गया पर थोड़ा सा साहस कर मैं उनके पास जा पंहुचा , बब्बर शेर जोर से दहाड़ा और बाकि भी मुझे घूरने लगे.. मैंने थोड़ी और हिम्मत दिखाई और उनके ठीक सामने जा पंहुचा.. अब वो मुझे और मैं उनको देख कर डर रहा था... (फिर एक छोटा सा इंटरव्यू....)

"मैं मैं बिहारी जंगल के समाचार पत्र से रिपोटर... "

शेर और उसके साथ दूसरे शेर जंगल का नाम सुनते ही आपस में कानापूसी करने लगे और मुझे अजीब सी नजरों से देखने लगे.. 

"तुम जंगल को कैसे जानते हो एक छोटे शेर ने पूछा मुझे...?? "

" मैं जंगल के समाचार पत्र का रिपोर्टर हूँ तो कई बार जंगल गया हूँ जंगल में रह रहे जानवरों की खबर लाने... 

कल ही हमारी पत्रिका में एक शानदार फोटो छपी हैं सुन्दर वन की वो मैंने ही खींची थी.. देखोगे तुम सब... "

" हाँ हाँ देखेंगे... दिखाओ... दिखाओ... "दूसरे छोटे शेर ने कहा...

अपने झोले से बीते कल की पत्रिका निकाली और उनको दिखाने लगा... इतने में सबसे बड़ा शेर जोर से दहाड़ा और बोला "तुम सब ये क्या कर रहे हो ये इंसान हैं मतलबी.. अपना काम निकलने के लिये तुम्हें ऐसी फोटो दिखा कर लालच दे रहा हैं.... दूर रहो इससे.. "

" नहीं नहीं डरो मत मैं उनमें से नहीं हूँ... "मैंने कहा !

"मैं सब जानता हूँ मुझे मत बताओ बचपन से देखता आ रहा हूँ और आज मैं बारह का हूँ..." शेर ने कहा !

धीरे धीरे इधर उधर की बातें कर मैंने उन्हें इंटरव्यू के लिये मना लिया... अब शुरू होता हैं शेरो के साथ इंटरव्यू.....

मैं :- "आप कहा से और कैसे आये हो...? "

शेर :- "हम सुन्दर वन के जंगल से ही आये हैं जहाँ कि तुम थोड़ी देर पहले फोटो दिखा रहे थे ! वहाँ ही हमारा घर हैं.. आजकल जंगल में और उसके आसपास बहुत शांति हैं तो सोचा अचानक क्या हो गया ! पहले तो शिकार करने और पेड़ काटने के लिये बहुत से लोग आते रहते थे पर अभी कुछ दिनों पहले से कोई हलचल नहीं हुई तो सोचा चल कर देखे क्या हो गया.. ? इसलिए घुमते घूमते आ गये... !"

मैं :- "अच्छा ! आपके साथ ये कौन कौन हैं...?? "

शेर :-" मैं , मेरी धर्मपत्नी , मेरे दोनों बच्चे एक लड़का और एक लड़की.. और ये जो गब्बर की तरह देख रहा हैं ना ये मेरे छोटे भाई का लड़का हैं... "

मैं :- "ओहो.... यानी आपका पूरा परिवार हैं.. पर यहाँ क्या करने आये हो यहाँ तो आपका कोई नहीं....??? "

शेर :- "हाँ जानते हैं पर श्रीमती जी और बच्चे जिद्द कर रहे थे कि उनको शहर घूमना हैं.. बहुत दिनों से मैं भी सोच रहा था इनको घुमाने को.. और अभी अचानक से इतनी शांति देखि तो सोचा चलो इन सब की शिकायत हैं वो भी दूर हो जाएंगी और शहर में क्या हो गया अचानक ये भी पाता चल जायेगा तो सबको साथ लेकर आ गया... !"

मैं :- "क्या देख रहे हो फिर यहाँ पर...?? "

शेर :-" बहुत शांत हैं यहाँ का माहौल आजकल यह दो दिन से देख रहा हूँ.. सड़को पर सन्नाटा पसरा पड़ा हैं , ना कोई पी पी ना कोई खींच खींच... दूर तक साफ दिखाई दे रहा हैं बस कही कही दो चार खाकी कपड़ो में तुम्हरी तरह मुँह पर कपड़ा लगाए हुए आदमी ही देख रहे हैं.. और कभी कभी बड़ी बड़ी गाड़िया आते जाते दिख जाती हैं... सुबह सुबह कुछ कुछ दुकाने भी खुल रही हैं पर थोड़ी देर में ही बंद भी हो जाती हैं बस दवाइयों की दुकानो को छोड़ कर.."

मैं :- "खाकी कपड़ो वालो ने रोका नहीं क्या आपको...?? "

शेर :-" नहीं... जंगल से निकल कर जब शहर में प्रवेश करना वाला ही था तो देख कि खाकी कपड़े पहने तीन चार लोग एक आदमी को पीट रहे थे तो मैंने सोचा क्या मांजरा हैं पहले रुक कर देखना चाहिये.. लगभग तीस मिनट इंतजार के बाद एक और आदमी आया तो फिर खाकी कपड़ो वालो ने उसको भी पीटा तो मुझे लगा कि अगर हम लोग भी सड़क से जायेंगे तो ये हमें भी पीटेंगे तो हम सभी सड़क से ना आकर सड़क तीन-चार सौ मीटर दाहिने से शहर में प्रवेश कर लिया..."

मैं :- "कैसा लग रहा हैं यहाँ पर आप सबको... ??"

शेर :- "डर लग रहा हैं यहाँ पर हिम्मत कर घूम रहे हैं.. मतलबी हैं इंसान पता नहीं वापस घर जा पाएंगे या नहीं.. ये उसकी कोई सोची समझी चाल हो सकती हैं जंगल के जानवरों को बाहर निकलने की !"

(बीच में ही बात काटते हुए छोटा शेर... )

" मजा आ रहा हैं यहाँ बहुत.. पापा हम यही रहेंगे हैं ना बहिन और गब्बर... हाहाहा.... "

मैं :- "सबसे चौकाने वाली क्या चीज देखी अपने यहाँ...??"

शेर :- "थोड़ी देर पहले हम लोग उस गली से आ रहे थे तो हमने देखा जंगल के बहुत सारे जानवर एक ही जगह बहुत से खड़े हैं , हिल डुल भी नहीं रहे.. थोड़ी देर तो हम देखते रहे.. शायद उन्होंने हमें भी देख लिया था पर कोई अपनी जगह से भी नहीं हिला.. जंगल में तो हमें देखते ही दुम दबा कर भाग जाते हैं चाहे कोई सा भी जानवर हो... 

और हाँ मेरे जैसा एक शेर और भी था वहाँ उनके साथ ही पर वो ना ही हमसे मिलने आया और ना ही दूर से भी कोई बात की... पता नहीं क्यों...??? नाराज सा लग रहा था हमसे... "

मैं :- "हाहाहा... वो सब के सब निकली थे इसलिए तुम से डरे नहीं.."

शेर :- "नकली... ऐसा कैसे हो सकता हैं ? चलो यहाँ से भाग चलते हैं नहीं तो ये इंसान हमें भी उनकी तरह बना देगा.... "

एक दो ती.... न...........

मैं :- "रुको" जोर से चिलाया.... 

शेर :-" हम नहीं रुकेंगे.... पीछे मूड कर मत देखना.... कोई भी..... "

मैं :-" अरे रुको.... (और जोर से..... )थोड़ा सा इंटरव्यू और बचा है बस.. फिर चले जाना... अभी कोई भी इंसान बाहर नहीं निकलता.. देखो कोई दिखाई दे रहा है क्या...?? "

शेर :- (स्पीड थोड़ी कम करता हैं और पीछे देखता हैं... )  "अरे सच में पीछे तो उसके अलावा कोई भी नहीं हैं... (हाँफते हाँफते... )"

"रुको रुको... "

(सभी रुक जाते हैं... जोर जोर से चल रही साँसो को.............)

तीनो छोटे शेर बैठ जाते हैं सडक पर ही...

(मैं भी हाँफता हाँफता उनके पास जा पंहुचा... कुछ पंहुछता उससे पहले ही शेर ने मुझसे पूछा कि..)

शेर :- "कहाँ गये शहर से सभी इंसान..? "

मैं :- "कही गये नहीं सब अपने अपने घरों में ही हैं आजकल.. "

शेर :- "क्यों.. क्या हुआ...?"

मैं :- "एक वायरस की वजह से.. आजकल ये वायरस बहुत तेजी से फैल रहा हैं.. विश्व की बड़े बड़े देश जैसे अमेरिका , स्पेन , इटली , फ्रांस , जर्मनी , यू. के. इत्यादि घुटनो पर आ गये... विश्व की अर्थव्यवस्था डगमगा गई हैं पूरी तरह से... "

शेर :- "अच्छा ! तो ये बात हैं... पर किसने माना किया घर से बाहर निकलने को.. और ये जिद्दी , घमंडी , लालची इंसान मान कैसे गया..? इसको तो घर पर रहना अच्छा ही नहीं लगता हैं..?? दूर दूर तक फैले जंगलो में जहाँ हमारे पूर्वज रहते थे वहाँ वहाँ तो इसने फैक्ट्रीया बना ली हैं.. अब हम तो थोड़े बहुत बचे जंगलो में ही अपना गुजारा कर रहे हैं... "

मैं :-" हाँ ये ही बात हैं.. मोदी जी का नाम तो सुना हैं ना तुमने... "

शेर :- "हाँ हाँ सुना हैं जो अभी हमारे देश के प्रधानमंत्री हैं वो ही ना... "

मैं :- "हाँ वो ही.. उन्होंने ही मना किया हैं पर ये मानते कहाँ हैं...? तुमने आते वक़्त देखा था ना कि कुछ खाकी कपड़े पहने लो शहर में आने वाले रास्ते पर खडे थे और लोगों को पीट रहे थे... वो खाकी कपड़े पहने पुलिस वाले हैं और जिनको वो पीट रहे थे वो बेवकूफ इंसान.. जो घर पर नहीं बैठ सकते... "

शेर :- "अच्छा... पर सब इतना क्यों डरे हुए हैं इस वायरस से..?? "

मैं :-" ये वायरस बहुत खतरनाक हैं और बहुत तेजी से फैलता भी..

ये जमीन से थोड़ा सा ही ऊपर उड़ सकता हैं.. अगर किसी एक को हो तो दूसरे को भी हो सकता हैं यानी ये संक्रामक हैं... इसके लक्षण भी आम बीमारियों की तरह ही हैं.. परन्तु हैं बहुत खतरनाक.. जिनकी रोग प्रतिरोधक समता ठीक नहीं हैं उनको बहुत तेजी से प्रभावित करता हैं... जैसे वृद्ध , बच्चे , शारीरिक रूप से कमजोर... "

शेर :- ,इतना खतरनाक..? तो अभी हमारे देश में क्या स्थिति इसकी..?"

मैं :-" हाँ इतना खतरनाक है कि अगर कोई संक्रमित दूसरे इंसान के सम्पर्क में भी आ जाये तो दूसरा भी संक्रमित हो जाता हैं और हाँ ये यही खत्म नहीं होता ऐसे ही आगे बढ़ता रहता हैं एक चैन कर तरह.... अब तक तो हमारा देश बहुत अच्छी स्थिति में होता अगर कुछ लोग बेवकूफी ना करते तो.. 

हाथ जोड़ जोड़ कर समझाया था सब को... आजकल कोई भी सोशल मिडिया देख लो सब में समझाया जा रहा हैं कि ये मत करो वो मत करो.. फिर नहीं मानते ना... इंसानो के बीच भी कुछ जानवर रहते हैं ना... "

शेर :- "क्या क्या बताया जा रहा है.?? कैसे बच सकते हैं इससे...??? "

मैं :-" हाथ जोड़ कर समझाया था पहले ही कि.. 

बार बार साबुन से हाथ धोये... 

हाथों को सेनेटाइज करे..

बार बार मुँह , नाक , कान ना छुए..

मास्क पहने...

दस्तानो का प्रयोग करे..

थोड़ी थोड़ी दूर बना कर रहे...

एक जगह इकट्ठा ना हो.. 

कुछ दिन जहाँ पर हो वहाँ ही रहे.. 

खाने कि व्यवस्था सरकार कर देगी...

सरकार और स्थानीय प्रशासन भी आपका सहयोग करेगा..

परन्तु नहीं माने बेवकूफ़.... आज भी देख जाते हैं सड़क पर कही कही... 

अरे आजकल तो क्या छोटे छोटे बच्चे क्या वृद्ध , महिलाये सभी इससे कैसे बचा जा सकता हैं जैसे जागरूकता बढ़ाने वाले वीडियो बना बना कर समझा रहा हैं...   पर नहीं समझ रहा अभी भी बेवकूफ़ लोग... "

शेर :-, अरे बहुत बता दिया हैं इसके बारे में पर अभी तक इसका नाम नहीं बता..? "

मैं :- "कोरोना नाम है इसका कोरोना..... "

मैं कुछ और बोलता उससे पहले देखा कि वो सभी आपस में कानापूसी करने लगे... और शायद समझ गये कि यहाँ रहना ठीक नहीं.... 

इस बार बब्बर शेर ने नहीं सबसे छोटे वाले शेर ने गिनती जोर से बोली....

एक.......

दो..............

और

तीननननननन............

   

 ऐसे भागे जैसे कोई सर्कस में काम करने वाले इंसान को देख लिये हो जो अपने चाबुक कि सहायता से बब्बर गब्बर देखने वाले शेर को अपने इशारों से अपनी अंगुली पर नचवा रहा है

थोड़ी देर मैं देखा रहा... बहुत दूर तक वो सब दिखते रहे फिर मेरी आँखो से ओझल हो गये... फिर अचानक से याद आया कि यार शेर का इंटरव्यू तो मैं ले रहा था पर ये शेर तो मेरा इंटरव्यू लेकर चला गया।

            



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