साहित्यसेवी सत्येन्द्र सिंह

Others


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साहित्यसेवी सत्येन्द्र सिंह

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एफ.डी.आई.

एफ.डी.आई.

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सरकार बड़ी खुश थी

हर बीते रोज़ के साथ एफ.डी.आई. बढ़ रहा था

मीडिया में बढ़-चढ़ कर खबरें आ रही थीं

किन्तु वह खुश न हो पा रहा था

“पड़ोसी की गाय और एफ.डी.आई. कौन से कभी अपने होते हैं?” – उसे रह रहकर अपने पिताजी की बात याद आती रहती है


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