STORYMIRROR

Divyanjli Verma

Children Stories

4  

Divyanjli Verma

Children Stories

चीटि को मिली सफ़लता

चीटि को मिली सफ़लता

3 mins
279

 चीटि होना आसान बात थोड़ी है। बहुत मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। और अगर कोई सिपाही चीटि या कर्मचारी चीटि हो तो और भी ज्यादा।

मैं भी एक सिपाही चीटि हूँ। सबको लगता है मैं सिपाही हूँ तो बहुत ताकतवर हूँ। कोई भी काम बहुत आराम से चुटकी बजा के कर सकता हू। लेकिन नहीं,, सच तो ये है कि मुझे भी उतनी ही मेहनत करनी होती है जितनी बाकी चीटियों को। और कभी कभी तो मुझे कर्मचारियों वाले काम भी करने पड़ जाते है।

एक दिन की बात है। बरसात आने मे कुछ दिन ही रह गए थे। तो सारी चीटियां की टोली ने किसी ऊँची जगह पर जाना शुरू कर दिया था। हमारी टोली को भी एसी ही किसी जगह की तलाश थी। जो ऊँची हो, गर्म हो और खाने की भी कोई दिक्कत ना हो।

इसके लिए कुछ सिपाही चीटियों को चुना गया। और उन्हें भेज दिया गया एसी किसी जगह की तलाश मे। मैं भी उन सिपाहियों मे से एक था। मैं चल पड़ा शहर की ओर कोई अच्छी जगह देखने।

इंसानो के पैरों से बचते हुए, चिडियों से बचते हुए, बड़ी मुश्किल से मैं एक सोसाइटी मे पहुचा। जहा पर 5 मंजिला इमारते थी। मुझे वो जगह बहुत सही लगी। तो मैंने सोचा पहले अंदर जाके सब देख लेता हू फिर सिग्नल भेज के बाकी चीटियों को भी बुला लूँगा।

तो मैं अंदर जाने लगा। लेकिन एक dog गेट पर बैठा था। मैंने सोचा कौन इससे उलझे,,,,चलो दीवार से चलते है।

 फिर मैं दीवार पर चढ़ रहा था कि अचानक बहुत तेज हवा चलने लगी। अब मैं ठहरा छोटी चीटि और हवा इतनी तेज। एक बार तो मैं उड़ कर दूर ही फेंका गया था। लेकिन मैंने हार नहीं मानी और दुबारा कोशिश की। मैं चलता गया, चलता गया , चलता गया । आखिर मैं तीसरी मंजिल तक पहुच ही गया।

वहां पहुंच के मैं खिड़की से अंदर गया। अंदर तो बहुत बड़ा घर जैसा था। लेकिन मुझे वो जगह देखनी थी जहा खाने का समान हो और साथ मे सोने वाला कमरा ढूढ़ना था। क्योंकि इंसान जिस कमरे मे सोते है वो कमरा गर्म होता है। तो मैं उसी कमरे मे अपना बिल बनाऊँगा । जिसमें मेरी चीटियों कि टोली रहेगी।

तो मुझे वो दोनों कमरे ही मिल गए। लेकिन मैंने देखा कि किचन वाला कमरा भी बहुत बढ़िया है तो मैंने सोचा इसी मे बिल बनाऊँगा ।रहना खाना एक जगह ही हो जाएगा।

फिर मैंने अपने साथियो को सिग्नल देके वहां बुला लिया और खुदाई का काम शुरू हो गया। पूरा एक दिन लगा बिल तैयार होने मे। अब बारी थी औरतों, बच्चों ,अंडों और रानी को लाने की। मुश्किल तो बहुत हुई लेकिन आखिर मे सफ़लता मिल ही गई। और हम लोग अपने नए घर मेरा मतलब बिल मे शिफ्ट हो गए। 


Rate this content
Log in