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Vijay Vibhor

Others

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Vijay Vibhor

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अनसुनी

अनसुनी

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आज मौसम ने करवट ली, बड़े ज़ोरों से बादल गरजे। हर रोज की भांति आज फिर वहाँ से बड़ी जोर की चीख सुनाई दी। लेकिन किसी को समझ नहीं आया यह चीख बादल की गड़गड़ाहट के डर से निकली थी या..


बहुत बड़ी हवेली से निकलने के कारण हर बार अनसुनी हो जाती थी यह चीख, लेकिन आज एक घटना अलग घटी। आज दो हाथ खिड़की के सरियों पर नज़र आए, जो पहले कभी नज़र नहीं आते थे। उन हाथों को देखकर कई जोड़ी क़दम हिम्मत कर उस बड़ी हवेली की तरफ़ बढ़ चले।


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