किसी की लाश में भी जान फूँक देने वाली थी मैं, फिर आज ना जाने क्यूँ खुद के बेजान जिस्म से सिहर सी ग... किसी की लाश में भी जान फूँक देने वाली थी मैं, फिर आज ना जाने क्यूँ खुद के बेजा...
ढुँढु तेरा आँचल फिर से दूर करने को अंधेरा माँ, आ, फिर से फेर सर पर हाथ मेरे, करदे पूरी सारी मुरादे ... ढुँढु तेरा आँचल फिर से दूर करने को अंधेरा माँ, आ, फिर से फेर सर पर हाथ मेरे, कर...