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PINKI KUMARI

Others

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PINKI KUMARI

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आँचल

आँचल

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तेरी तरह कोई समझता नहीं माँ,

सर पर हाथ कोई रखता नहीं माँ;


मन की बात मन मे ही रह जाती है,

आँखों को कोई पढता नही माँ;


अपने आँचल की छाँव तूने मेरी गलतियो को भी छिपाया माँ,

इस चिलचिलाती धूप ने मेरी खुबियो को भी जलाया माँ;


जब भी छोटी कोशिश की तूने हाथ बढाया माँ, 

बेगानों की भीङ मे तू बनी मेरा सहारा माँ;


ढुँढु तेरा आँचल फिर से दूर करने को अंधेरा माँ,

आ, फिर से फेर सर पर हाथ मेरे, कर दे पूरी सारी मुरादे माँ।।


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