ज़िंदगी
ज़िंदगी
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रिश्तों से बनती हूँ
रिश्तों से बिगड़ती हूँ
मैं ज़िंदगी हूँ
यूं ही चलती हूँ
मैं तुझमे भी हूँ
मैं उसमे भी हूँ
जैसा चाहे बना लो
मैं कुछ न कहती हूँ
पत्थर सी सख्त हूँ
हवा सी हलकी भी
मुझे मधुर गीत बना
मै थिरकता संगीत भी
तुझको देख कर ही
तेरी कहानी लिखती हूँ
मै ज़िंदगी हूँ
मै यूँ ही चलती हूँ।
