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Thakkar Nand

Others

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Thakkar Nand

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ज़िन्दगी का राज किसने पाया है

ज़िन्दगी का राज किसने पाया है

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कभी धूप कभी छाया है

कभी सत्य कभी माया है

बीत रही इस जिंदगी का

राज़ किसने पाया है?

कभी आस कभी विश्वास है

खुश दिल है कभी उदास है ,

महफ़िलों में नजर नहीं आती है

तन्हाई में दुश्मन जैसे पास है,

कभी हंसाया है इसने

कभी जी भरकर रुलाया है,

बीत रही इस जिंदगी का

राज किसने पाया है?

किसी के लिए सरताज है जिंदगी

कभी दो वक़्त की रोटी की मोहताज है,

कोई रो-रो कर निकाल रहा है

किसी के लिए एक बिंदास अंदाज है जिंदगी

कोई ठोकरों से टूट गया है देखो

किसी ने दूसरों की जिंदगी को सजाया है

इस बीत रही जिंदगी का

राज किसने पाया है?

नफरत की आग लिए दिल में

जलते रहते हैं कई लोग

और कुछ

खुशियों की दवाई बाँट रहे हैं

मिटाने को ग़मों के रोग,

जिंदगी ने अपने रूप से हमें

इस तरह से मिलाया है,

इस बीत रही जिंदगी का

राज किसने पाया है?


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