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अहसान बिन 'दानिश'

Others Romance

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अहसान बिन 'दानिश'

Others Romance

यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे

यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे

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यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे

साथ चल मौज़-ए-सबा हो जैसे


लोग यूँ देख कर हँस देते हैं

तू मुझे भूल गया हो जैसे


इश्क़ को शिर्क की हद तक न बढ़ा

यूँ न मिल हमसे ख़ुदा हो जैसे


मौत भी आई तो इस नाज़ के साथ

मुझपे एहसान किया हो जैसे


ऐसे अंजान बने बैठे हो

तुम को कुछ भी न पता हो जैसे


हिचकियाँ रात को आती ही रहीं

तू ने फिर याद किया हो जैसे


ज़िन्दगी बीत रही है "दानिश"

एक बेजुर्म सज़ा हो जैसे


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