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Kumar Kishan

Others

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Kumar Kishan

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यकीन नहीं होता

यकीन नहीं होता

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यकीन नहीं होता

मैं लेखक कैसे बना हूँ?

बनना चाहता था अधिकारी

पर,कलम कैसे पकड़ लिया हूँ?


शायद यही लिखा था

और नियति को यही मंजूर था,

वरना प्रशासन और राजनीति

में रुचि रखने वाला को

साहित्य कब मंजूर था?


शायद यही होता है

हर किसी की जिंदगी में,

करना चाहते हैं और पर

अक्सर कुछ और हो

जाता है जिंदगी में।



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