STORYMIRROR

Sapna M Goel

Others

4  

Sapna M Goel

Others

यादों की सफाई

यादों की सफाई

1 min
349

दीवाली की सफाई निपटा 

बैठी ही थी थक हार के

फिर भी लग रहा था छूट गया कुछ 

सोचा फिर से देखूँ नज़र मार के


बहुत सोचा बहुत देखा... पर कुछ समझ ना आया

बजी फिर घंटी एकदम...दिल ने दिमाग को खटखटाया

बोला मन में जो भर रखा हैं थैला

ना किया साफ तो हो जाएगा विषैला 

ईर्ष्या..द्वेष सब बाहर निकाल फेंका 

सोचा कर खाली मन को जो होगा जाएगा देखा


पर कुछ था...समझ ना आया इनको रखूँ या फेंकूँ

वो थी मेरी अनमोल खट्टी मीठी.... ""यादें""

नहीं वो मैं खाली कर नहीं पाई

क्योंकि उनमें ही तो थी मेरी जिन्दगी समाई।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन