वतन की रक्षा करेंगे।
वतन की रक्षा करेंगे।
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कटा कर सर अपना हम
वतन की रक्षा करेंगे।
फूल क्या चीज है
अपना तन मन अर्पण करेंगे।
अपने वतन से हम
दुश्मन के निशां मिटा देंगे,
खाक में मिला के जिन्दंगी
वतन को रोशन करेंगे।
कदम कदम लगे ठोकरें
नही गिरेंगे हम।
हंस के रुखसत-ए-जान
न्योछावर करेंगे हम।
गुलामी की बेड़ियाे तोड़कर
स्वतन्त्रता की इबारत लिखेंगे हम।
इस गुलशन की बगिया को उजड़ने नही देंगे
वतन को आजाद करा कर ही दम लेंगे।
