वक्त की बर्बादी
वक्त की बर्बादी
1 min
253
कभी कभी जिंदगी में
कुछ ऐसी उलझन
आती है कि मन
इतना बेचैन
हो उठता है
की समझ नहीं आता कि
क्या करे
तब फोन उठाकर
किसी को किया जाये
कभी फोन लगता नहीं
कभी कोई दूसरे कॉल
पर व्यस्त होता है
कभी कोई फोन
उठाता ही नहीं
यदि ग़लती से उठा भी
लिया तो कहते है
हम व्यस्त है
बाद में बात करते है
वक्त पर कोई
बात करता ही नहीं
सब वक्त निकाल कर
बात करते है
तब तक
सारी स्थिति सम्भल
चुकी होती है
तब
बात करने का
अर्थ सिर्फ वक्त
की बर्बादी
के अलावा कुछ
नहीं रह जाता है
