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भाऊराव महंत

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भाऊराव महंत

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वीर सरहद पर चला तेरे लिए

वीर सरहद पर चला तेरे लिए

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वीर सरहद पर चला तेरे लिए 

दुश्मनों से लड़ रहा तेरे लिए


आ सके कोई न अब घुसपैठिया

देख सीमा पर खड़ा तेरे लिए,


पीठ पर वह गोलियाँ खाई नहीं 

घाव सीने पर मिला तेरे लिए,


दर्द से जब चीखती हो मात तुम 

हार हमेशा तिलमिला तेरे लिए,


जान देते लाल सरहद पर सभी 

मौत का यह सिलसिला तेरे लिए।



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